बापू,

सादर नमन्‍…

ये अच्छा ही है जो आज तुम हमारे बीच नहीं हो…।

यदि होते तो बहुत तकलीफ़ में रहते…।

आसान नहीं है आँख, कान, मुँह बन्द रखना…