मेरा बेटा सत्यार्थ नाटक की तैयारी में [??:)]

घर खाली है निपट अकेले पड़े हुए है।
बीबी-बच्चे गाँव गये हैं, अड़े हुए हैं॥
मस्त रहा ब्लॉगिंग में, सबने करली कुट्टी।
विकट नतीजे लेकर आयी मेरी छुट्टी॥

बिटिया ने जब छुट्टी का सन्देश सुनाया।
नानी के घर जाने का अरमान बताया॥
मैने सोचा, चलो भली ये गाँव की मिट्टी।
विकट नतीजे लेकर आयी मेरी छुट्टी॥

सोचा था एकान्त रहेगा खूब लिखेंगे।
इतने सारे नये – पुराने ब्लॉग पढ़ेंगे॥
भर लेंगे गीतों, लेखों से अपनी किट्टी।
विकट नतीजे लेकर आयी मेरी छुट्टी॥

बैठे-बैठे बीत गये दिन खाली घर में।
लिख ना पाया, अटक गये लो गीत अधर में॥
बात हुई क्या, गुम क्यों है अब सिट्टी-पिट्टी?
विकट नतीजे लेकर आयी मेरी छुट्टी॥

ना बेटे का हँसना, रोना या चिल्लाना।
ना बेटी का होमवर्क है हमें कराना॥
नाहक हुई पलीद यहाँ जी मेरी मिट्टी।
विकट नतीजे लेकर आयी मेरी छुट्टी॥

सोच रहा हूँ, गाँव चलूँ, उनको ले आऊँ।
वहाँ दशहरा के दंगल में दाँव लगाऊँ ॥
सुनो चिठेरों लेता हूँ कुछदिन की छुट्टी।
विकट नतीजे लेकर आयी मेरी छुट्टी॥

(सिद्धार्थ)