तीर्थराज प्रयाग में संगम तट पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन (पिछले वृहस्पतिवार को) एक बहुत बड़े विष्णुमहायज्ञ की पूर्णाहुति हुई। कौशलेन्द्र जी महाराज द्वारा आयोजित इस वृहत्‌ यज्ञ अनु्ष्ठान के लिए पूरे देश से बाल-ब्रह्मचारी यज्ञकर्ता पुरोहितों को आमन्त्रित किया गया था। कुल १०८ यज्ञ मण्डपों की रचना की गयी थी। यज्ञ मण्डप के चारो ओर परिक्रमा पथ पर असंख्य श्रद्धालुओं के बीच चलते हुए मैने अपने मोबाइल कैमरे से कुछ तस्वीरे लीं। आप भी देखिए:-

परिक्रमा पथ पर नर-नारी की अच्छी संख्या थी।

गंगा जी के तट पर फैली पवित्र रेत में फूस से बने पंक्तिबद्ध मण्डप अनुपम छटा बिखेरते हैं।


यज्ञ मण्डप के हवन कुण्ड से उठता धुँवा

परिक्रमापथ पर चहलकदमी

महिलाओं का उत्साह देखने लायक था।

भारी भीड़ को नियन्त्रण में रखने के लिए पुलिस की कोई आवश्यकता नहीं थी।

सभी यज्ञ मण्डप एक ही आकार के कुछ इस तरह के बनाये गये थे।

सभी यज्ञ मण्डपों में एक साथ आहुति के लिए अग्निप्रज्ज्वलित की गयी।


यज्ञ मण्डप के दूसरी ओर दो बड़े
पांडाल बने थे। एक में सैकड़ो आचार्य /पुरोहित रामचरितमानस का अखण्ड पाठ कर रहे थे। दूसरे में व्यास गद्दी से भागवत कथा चल रही थी।

अनुशासित आचार्य व पुरोहित


बताते हैं इस अवसर पर पूरी दुनिया से लाखो श्रद्धालु यहाँ पधारे । अद्‌भुत संगम था। सनातन भारत का एक छोटा रूप गंगा के किनारे उतर आया था। कदाचित्‌ यह भारतीय वैदिक ऋषि परम्परा को आगे बढ़ाने वाला था। काश इस यज्ञ के प्रभाव से गंगाजी की पवित्रता सभी प्रकार के सन्देहों से परे पुनः लौट आए।
(सिद्धार्थ)

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