ये रही एक माइक्रो-पोस्ट

टूटी-फूटी से हुआ, सपना इक साकार।

भेंट चढ़ा ब्लॉगरी के पूरा इक परिवार॥

आप सबकी शुभकामनाओं की सख़्त जरूरत है।

पुछल्ला:

डॉ. अरविन्द मिश्रा ने आज हमारी जोड़ी की तस्वीर तलाश किया जो थी ही नहीं। नहीं मिली तो किसी जोड़ा-जामा टाइप फोटू की फरमाइश भी कर दिए। हम ठहरे तकनीक से पैदल, सो शादी वाली फोटू यहाँ चेंप न सके। लेकिन एकदम ताजी फोटू भतीजे से खिंचवा ली है। आप भी देखिए 🙂

परिणय दशाब्दि  (2) (सिद्धार्थ)