“हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया” में प्रवेशोत्सुक नये कलमकारों को चिठ्ठाकारी के विविध पक्षों से परिचित कराने के लिए जो कार्यशाला आयोजित की गयी उसके चित्र आप देख चुके हैं। अब बारी है रिपोर्टिंग की। अनेक बड़े भाइयों ने विस्तृत जानकारी चाही है। नये लोग भी इसे यहाँ से जानना चाहेंगे कि हमने उन तीन घण्टों में ऐसा क्या किया जो शहर के सभी अखबारों को इसकी चित्रमय रिपोर्टिंग करनी पड़ी। विश्वविद्यालय में फोटो पत्रकारिता और जन संचार की पढ़ाई करने वाले छात्रों और शहर में रहने वाले अन्य बुद्धिजीवियों व पत्रकारों से बने श्रोता समूह को क्या बताया गया, आइए जानते हैं:

सर्वप्रथम भारतीय परम्परा के अनुसार सभी अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ (bouquet) भेंट करके किया गया। प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक श्री एस.पी. श्रीवास्तव जी ने मुख्य अतिथि की भूमिका निभाते हुए दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का विधिवत उ्द्‌घाटन किया। पाँच बाती वाले दीप-स्तम्भ में घी के दीपक जलाने में पाँचो वक्ताओं ने हाथ बँटाया। इमरान की शेरो-शायरी ने माहौल को जिन्दा बनाए रखा।

जुगनू भी मेरे घर में चमकने नहीं देते,

कुछ लोग अन्धेरों को सिमटने नहीं देते।

हम हैं कि नयी पौध लगाने पे तुले हैं;

बरगद हैं कि पौधों को पनपने नहीं देते॥

प्रो.अलका अग्रवाल कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर में था इसलिए विश्वविद्यालय की महिला सलाहकार समिति की अध्यक्ष और अर्थशास्त्र की विभागाध्यक्ष प्रो.अलका अग्रवाल जी अतिथियों का स्वागत करने स्वयं उपस्थित हो गयी थीं। इमरान उन्हें बता नहीं पाये थे कि यहाँ क्या होने वाला है क्योंकि उन्हें भी इनके आगमन की पूर्वसूचना नहीं थी। जब उन्होंने बताया कि वे स्वागत करने आयी हैं तो संचालक की भूमिका निभा रहे उनके शिष्य को माइक थमाना ही था। फिर बकौल ज्ञानजी आगे वही हुआ जो शाश्‍वत है। सबके शुरुआती उत्साह के सूरज पर उनका करीब २० मिनट का माइक-मोह घने बादल के रूप में छाया रहा। देश, काल, वातावरण और राजनीति से सम्बन्धित अनेक बातें होती रहीं और श्रोता किसी खुर्राट ब्लॉगर की भाँति उसे `स्किप’ करते रहे।

आखिरकार संचालक को मौका मिला और असली बातें शुरू करने के लिए सबसे पहले सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी बुलाए गये। इससे यह बात पुष्ट हो गयी कि इमरान को कवि सम्मेलनों और मुशायरों के कुशल संचालन का अच्छा अनुभव है। जहाँ नौसिखिए कवियों को शुरू में निपटाना पड़ता है क्यों कि श्रोता अभी महफिल छोड़ने के बारे में नहीं सोच रहे होते हैं।

विषय प्रवर्तन मैने अपने लिए बहुत साधारण काम ले रखा था- सिर्फ़ यह बताने का कि यहाँ क्या-क्या बताया जाएगा और उसको बताने की जरूरत क्यों है। लेकिन मुझे सबसे पहले यह स्पष्ट करना पड़ा कि यहाँ क्या-क्या नहीं बोलना है। समय के प्रबन्धन की जो बात किसी वार्ताकार को आगे बतानी थी उसका अनुपालन तत्काल करने की विनती मुझे करनी पड़ी। हम पहले ही आधा घण्टा गँवा चुके थे।

मैने मुद्दे पर लौटते हुए सबसे पहले यह बताया कि ब्लॉग आज के जमाने की ऐसी विद्या है जिसे सीखने के लिए किसी गुरू की आवश्यकता ही नहीं है। यहाँ जो लोग आए हुए हैं वो सभी मात्र यही बताने आए हैं कि इसे बहुत टेक्निकल मानकर दूर-दूर न रहिए। केवल इन्टरनेट युक्त कम्प्यूटर के पास बैठने की देर है। यदि हमारे भीतर जिज्ञासा की जरा भी लौ जल रही है तो बाकी सारी पढ़ाई अपने आप हो जाएगी। इक्कीसवी सदी में परवान चढ़ा यह माध्यम हमें विचार अभिव्यक्ति का एक ऐसा मौका देता है जहाँ हम स्वयं रचनाकार-लेखक, सम्पादक, प्रकाशक और मुद्रक सबकी भूमिकाएं निभाते हैं। कोई हमारा हाथ रोकने वाला नहीं है। केवल हमारा अपना विवेक ही है जो हमें कुछ करने या न करने के लिए रास्ता दिखाता है।

यहाँ बैठे अनुभवी लोग आपको यह नहीं बताएंगे कि आप क्या लिखें। बल्कि यह बताएंगे कि अपने मन की कोई भी बात लिखने और दूसरों को बताने से यदि अभी तक आप वंचित रह गये हैं तो अब समय आ गया है कि बिना किसी सम्पादक की कृपा का जुगाड़ खोजे आप अपने मन के उद्‌गार खुलकर व्यक्त कर सकते हैं। घर बैठे-बैठे आप पूरी दुनिया में पढ़े जा सकते हैं और अपने लिखे हुए पर पाठकों की स्वतंत्र टिप्पणी भी पलक झपकते पा सकते हैं। अपरिमित स्वतंत्रता के इस सुलभ माध्यम का आप कैसे प्रयोग करेंगे यह हम नहीं बताएंगे, यह तो आपको ही तय करना है। हम तो यह बताएंगे कि इसका प्रयोग कितने प्रकार से किया जा सकता है। कविता, कहानी, गीत, ग़ज़ल, डायरी, समाचार, व्यंग्य, आदि लिखकर, बोलकर, गाकर, या वीडियो बनाकर चाहे जैसे पूरी दुनिया को पेश कर सकते हैं।

हमने यहाँ इन अनुभवी ब्लॉगर्स को सिर्फ़ इस लिए बुला रखा है कि ये अपने अनुभव से आपको वह सब बताएंगे जो आपके मन के संकोच और संशय को मिटा देगा। एक ब्लॉगर के रूप में आप जो यात्रा शुरू करने वाले हैं उस यात्रापथ पर पहले से ही चलने वाले आपको इस राह की विशेषताओं के बारे में बताएंगे। यहाँ यह पता चलेगा कि यह सड़क कंकड़ीली, पथरीली, ऊबड़-खाबड़ है कि साफ-सुन्दर, चिकनी और रंगी-पुती आकर्षित करने वाली है।

इस यात्रा वृत्तान्त के पहले हमराही कानपुर के श्री अनूप शुक्ल जी  आपको ब्लॉगिंग के शुरुआती दिनों की बात बताते हुए अब तक की यात्रा से परिचित काराएंगे। आपका फुरसतिया नामक ब्लॉग यद्यपि लम्बी पोस्टों के लिए जाना जाता है लेकिन एक बार पढ़ना शुरू करने के बाद इसे बीच में छोड़ा ही नहीं जा सकता। आप हिन्दी भाषा के सभी ब्लॉग्स पर नजर रखते हैं। चिठ्ठाचर्चा नामक ब्लॉग से आजकल छपने वाले सभी चिठ्ठों में से चुनिन्दा पोस्टों की समीक्षा और लिंक्स वहाँ पायी जा सकती हैं। आज की चिठ्ठाकारी की दुनिया में जो रुझान चल रहे हैं ये उनकी नब्ज टटोलते रहते हैं। इनसे हम जानेंगे कि कैसी है हिन्दी चिठ्‌ठाकारी की दुनिया की आम प्रवृत्तियाँ और वे कौन लोग हैं जिन्होंने इसे यहाँ तक पहुँचाने में सक्रिय योगदान किया है।

चिठ्ठाकारी का कार्य एक खास उद्देश्य से किया जाना चाहिए। यह सिर्फ मन बहलाव के लिए करने पर अधिक दूरी तक नहीं जाता। उद्देश्य सामाजिक भी हो सकता है और व्यक्तिगत भी। इसी कड़ी में कुछ विज्ञानप्रेमी लेखकों ने बड़ी गम्भीरता से वैज्ञानिक विषयों पर ब्लॉग लेखन की एक विशिष्ट धारा शुरू की है। इनका प्रकट उद्देश्य समाज में व्याप्त अनेक रूढ़ियों और अन्धविश्वासों को मिटाना और सबके भीतर एक वैज्ञानिक सोच विकसित करने  का है। विज्ञान सम्बन्धी विषयों पर लिखने वाले चिठ्ठाकारों के संगठन साइंस ब्लॉगर्स एसोसिएशन ऑव इण्डिया के अध्यक्ष और क्वचिदन्यतोअपिसांईब्लॉग के लेखक वाराणसी से आए डॉ. अरविन्द मिश्रा जी इस धारा पर प्रकाश डालेंगे।

जब आप हिंदी भाषा का ब्लॉगर बनने का निर्णय लेकर कम्प्यूटर का ‘माउस’ पकड़ेंगे और की-बोर्ड (कुञ्जीपटल) पर केवल अंग्रेजी के अक्षर लिखा पाएंगे तो थोड़ी उलझन हो सकती है। हिन्दी टाइपिंग का ज्ञान इस विद्या के लिए जरूरी तो है नहीं। इसलिए आपको यह जानना होगा कि अपने कम्प्यूटर पर हिन्दी में लिखना-पढ़ना कैसे सम्भव हो पाएगा। मैं इतना बता दूँ कि यह बहुत आसान और सहज है। कैसे? यह आपको कविता जी बताएंगी। हैदराबाद (आन्ध्र प्रदेश) में रहने वाली डॉ.कविता वाचक्नवी आपको यह बताने आयी हैं कि हिन्दी कम्प्यूटिंग कितनी आसान है। आपके दर्जन भर ब्लॉग्स में से हिन्दी-भारत इस दिशा में काफी चर्चित है। इसी नामसे याहू-समूह का संचालन भी आप करती हैं। आप जानेंगे कि किस प्रकार शब्दों की रोमन वर्तनी लिखकर आप देवनागरी में छाप सकते हैं। कम्प्यूटर पर हिन्दी अनुप्रयोगों पर पूरा पैकेज आपको मिलने वाला है।

यहाँ एक बात मैं ही बता दूँ कि हिन्दी ब्लॉगिंग से अभी पैसा कमाने का काम नहीं शुरू हो सका है। अभी यह शैशवकाल में हैं। हम पढ़-लिखकर बड़े हो जाएंगे तभी कमाने के बारे में सोच पाएंगे। अभी तो स्वान्तः सुखाय का मुहावरा ही चलता है। जाहिर है कि जीविका के लिए या उसकी तैयारी के लिए आप कोई अन्य कार्य भी कर रहे होंगे। विश्वविद्यालय की या प्रतियोगी परीक्षाओं की पढ़ाई हो, प्राईवेट या सरकारी नौकरी हो, छोटा या बड़ा व्यवसाय हो, या वकील, डॉक्टर, पत्रकार, अध्यापक आदि का पेशा हो, ये सभी समय माँगते हैं। रोजी रोटी से जुड़े इन कार्यों के साथ आप ढिलाई नहीं बरत सकते। इसके अतिरिक्त कुछ सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियाँ भी हैं जो आपका समय चाहेंगी।

ब्लॉगिंग का नशा ऐसा है कि इसके आगोश में आपकी दिनचर्या गड़बड़ा सकती है। आप स्वास्थ्य को लेकर भी परेशान हो सकते हैं। ऐसे में आपको अपने समय का प्रबन्धन चतुराई और अनुशासन से करना पड़ेगा। हमारे बीच इस कठिन कार्य में अत्यन्त सफल होकर सबको चमत्कृत कर देने वाले हिन्दी ब्लॉगिंग के शीर्षपुरुष मौजूद हैं। ज्ञानदत्त पाण्डेय जी रेल विभाग के बहुत बड़े अफसर हैं। एन.सी.आर. की सभी मालगाड़ियाँ आपका इशारा पाकर ही सामान लादती हैं और गन्तव्य के लिए प्रस्थान करती हैं। नौकरी में चौबीसो घण्टे ऑन लाइन रहने वाले ज्ञानजी अपनी मानसिक हलचल को जितने सातत्य और सुरुचिपूर्ण ढंग से हमारे बीच प्रकाशित करते रहते हैं वह अद्वितीय है। इनसे हम एक सफल ब्लॉगर की सकारात्मक और नकारात्मक सीमाओं के बारे में जानेंगे और ब्लॉग प्रबन्धन के गुर सीखेंगे।

हमारा प्रयास होगा कि जब आप यहाँ से वापस जाएँ तो घर पहुँचते-पहुँचते आप अपने ब्लॉग का नाम तय कर चुके हों और एक दो दिन में आपका लिखा हम ब्लॉगवाणी पर देख सकें।

प्रत्येक वार्ताकार अपनी बातों को पूरा करने के बाद आपसे एक दो प्रश्न ले सकता है। आप अपना प्रश्न लिखकर रख लें। सम्भव है कि चारों वक्तव्य पूरा होने तक आप अपने प्रश्न का उत्तर पा जाएँ। लेकिन यदि फिर भी कुछ छूटा रह जाता है तो उसे आखिरी आधे घण्टे के प्रश्‍नोत्तर काल में निस्संकोच पूछें। यह एक दुर्लभ अवसर है। इसे हाथ से कत्त‍ई न जाने दें।

मैने चलते-चलते अपनी यह व्यक्तिगत राय भी रख दी कि आज इक्कीसवीं सदी में सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते कदम के साथ कदम मिला कर चलना प्रत्येक पढ़े-लिखे व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए। आज के जमाने में यदि आपका कोई ब्लॉग नहीं है तो  आप अपने व्यक्तित्व को सर्वश्रेष्ठ और पूर्ण नहीं मान सकते। ब्लॉग आपके प्रोफ़ाइल को मूल्यवान बनाता है।

!!धन्यवाद!!

(…जारी)

(अगला पाठ: अनूप शुक्ल जी का)

(सिद्धार्थ)