पिछले पन्द्रह दिनों से मैं अपने घर को स्थान्तरित करने की जद्दोजहद में लगा रहा। इस दौरान पोस्ट करने लायक अनेक सामग्री हाथ लगी, बहुत अच्छे आप सबसे बाँटने लायक अनुभव हुए, नये-नये लोगों से मुलाकात हुई और बिल्कुल नये वातावरण में स्थापित होने के अनेक खट्टे-मीठे अनुभव भी हुए। इन सब बातों को मौका देखकर आपसे बताऊंगा। लेकिन अभी तो एक गम्भीर कार्यक्रम आ पड़ा है। इसलिए सबसे पहले यह काम की बात बता दूँ।

वर्धा में पाँव रखते ही कुलपति जी ने मुझे उस राष्ट्रीय ब्लॉगर गोष्ठी की याद दिलायी जो पिछले वर्ष इलाहाबाद में जबरदस्त सफलता के साथ सम्पन्न की गयी थी। (जो नये साथी हैं उन्हें यहाँ और यहाँ भी उस गोष्ठी की रिपोर्ट मिल जाएगी। फुरसतिया रिपोर्ट की गुदगुदी यहाँ है।) जैसा कि आप जानते हैं, वर्धा वि.वि. द्वारा इसे एक नियमित वार्षिक आयोजन बनाने का फैसला लिया गया था। इसी क्रम में कल कुलपति जी ने विशेष कर्तव्य अधिकारी राकेश जी को इस वर्ष के आयोजन की हरी झण्डी दिखा दी। फौरन राकेश जी ने एक विज्ञप्ति जारी कर मुझे इसकी कमान सौंप दी है। आप इसे देखिए-

ब्लॉगर गोष्ठी २०१०
ब्लॉगर गोष्ठी २०१० 001 

मुझे पूरा विश्वास है कि इस गोष्ठी को सफल बनाने के लिए आप सबका भरपूर सहयोग मुझे मिलेगा। आप की राय की प्रतीक्षा रहेगी। आप अपने सुझाव और प्रस्ताव अपनी टिप्पणियों से या सीधे मुझे ई-मेल से भेंज सकते हैं।

नोट: वर्धा आने के बाद मुझे आगाह किया गया कि बरसात की शुरुआत होने पर शुष्क पहाड़ों के ‘पंचटीला’ पर बसे इस विश्वविद्यालय के परिसर में प्रायः साँप और बिच्छू निकलते रहते हैं, जो जहरीले भी होते हैं। इसलिए सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। मुझे वे जीवधारी तो अबतक दिखायी नहीं पड़े हैं, लेकिन मेरी पिछली पोस्ट पर आयी एक अनामी टिप्पणी ने यह भान करा दिया कि वह चेतावनी सिर्फ़ उन भौतिक जीवों के बारे में नहीं थी। परिणाम स्वरूप मुझे यहाँ भी सुरक्षा बरतते हुए टिप्पणियों पर मॉडरेशन का विकल्प चुनना पड़ा है। आशा है आप थोड़ा कष्ट उठाकर भी अपनी राय से हमें अवगत कराते रहेंगे। सादर!

(सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी)

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